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रॉफेल पर सरकार की ढोल का पोल : Abhishek Mishra

Author :   Abhishek Mishra ; Lucknow 19 Dec 2018
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●●रॉफेल मसले पर भले ही सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सहारा लेकर बाजी मार ली हो पर हकीकत तो कुछ और ही है। माननीय उच्चतम न्यायालय की साख एवं स्वयत्तता पर प्रश्नचिन्ह.....??......... मेरी पहुंच से परे है। परन्तु जिस प्रकार सरकार ने रॉफेल निर्णय के जरिये जनता को गुमराह करने की पटकथा रची एवं जिस पर प्रकार निर्णय हासिल करने में झूठे तथ्यों का सहारा लिया गया, ये दोनों कारनामे कहीं न कहीं सरकार की स्थिति को संदिग्ध बनाने के लिए काफी हैं।
सरकार की ओर से प्रस्तुत तथ्यों की बिनाह पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया की #Rafale विमानों की कीमत केंद्र सरकार द्वारा CAG से साझा की गई जिसे CAG ने  संसद की PAC के समक्ष रखा।
               
निर्णय के तुरंत बाद PAC के चेयरमैन श्री मल्लिकार्जुन खाड़गे जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये यह स्पष्ट किया कि इस प्रकार की कोई भी रिपोर्ट उनके समक्ष नही रखी गयी। इसके बाद विपक्ष की घेराबन्दी से बौखलाई मोदी सरकार ने हलफनामा दाखिल कर मा० सुप्रीम कोर्ट से राफेल निर्णय में तथ्यात्मक सुधारों की गुहार लगाई। सरकार ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि माननीय न्यायमूर्तिगण सरकार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को सही तरीके से नही समझ पाए।
सरकार के हलफनामे को सच मानने का मतलब है कि न्यायमूर्तिगणों को मानसिक रूप से अक्षम मान लेना और यदि PAC के चेयरमैन श्री खाड़गे जी एवं उच्चतम न्यायालय के निर्णय को संयुक्त रूप से देखें तो सरकार की ढोल का पोल साफ नजर आ रहा है। यदि जज साहब वास्तव में दस्तावेजी भाषा समझने में अक्षम हैं तो सरकार को ऐसे न्यायधीशों के हटाये जाने की प्रक्रिया अपना चाहिए, और यदि फर्जी दस्तावेजों के जरिये कोर्ट को गुमराह किया गया है तो सरकार को न्यायालय के Contempt एवं फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने की सजा के साथ साथ जनता से माफी मांगनी चाहिए।

बाकी संतुष्टि हेतु तथ्यों पर गौर फरमाएं…..


#ChaukidarHiChorHai #IndiaTrustsCongress

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