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होकर अधीर हमने कब चाहा, दो क्षण भर तुमको पा लूं मैं : Abhishek Mishra "Satya"

Author :   Abhishek Mishra ;   Lucknow 24 July 2020 Follow on :  Facebook   |  Twitter  |   Linkedin  |  What's app होकर अधीर हमने कब चाहा, दो क्षण भर तुमको पा लूं मैं। जिस्मों पर कर अंकित निशान कब चाहा तुमको हथिया लूं मैं। मैं सदा सत्य के साथ रहा, हर क्षण अपने नैतिक पैमाने में दो क्षमा दान इस मानव को, जो पतित हुआ तुमको समझाने में।। जीवन में उन्नति के खातिर, कुछ मन्त्र तुन्हें सिखलाया है। नैतिकता से हासिल कर लो सबकुछ ऐसा सदमार्ग दिखाया है। पर तुमको लाज नही आयी हमपर रोष दिखाने में..... दो क्षमा दान इस मानव को, जो पतित हुआ तुमको समझाने में।। Abhishek Mishra LL.B Hons.(P.), Lucknow University

इक बार पुनः मैं टूट गया शायद सपने बुनते बुनते : Abhishek Mishra "Satya"

A uthor :   Abhishek Mishra ;   Lucknow 19 June 2 020 Follow on :  Facebook   |  Twitter  |   Linkedin  |  What's app इक बार पुनः मैं टूट गया शायद सपने बुनते बुनते, इक बार पुनः सब छूट गया, बस उम्मीदें चुनते चुनते, शायद मेरी बहु उम्मीदें ही इस टूटे दिल की दायी हैं मेरा बच्चों सा जिद्दीपन ही सब खोने में उत्तरदायी है।। मेरे टूटे इस दिल का बस तुम एक सहारा बन जाओ जलमग्न हुई मेरी आशाओं का एक किनारा बन जाओ, हमराह बनो इन सपनों का फिर से विश्वास जगा जाओ जीवित हूँ अबतक आशा में इक बार पुनः फिर आ जाओ।। धूमिल होती.... मेरी उम्मीदों में फिर पंख से लगाओ तुम, जो खोया है तुमको पाने में वो आत्मविश्वास जगाओ तुम। जीवन अभी बहुत लंबा यूं तन्हा चलना मुश्किल होगा...... पर तुमसा हमसफ़र मिला शायद तो फिर सबकुछ मुमकिन होगा।। सच पूछो तो रो रो कर भी शायद तुमको भुला नहीं पाया, बस ख्वाबों में तुमको देख देख.....शायद मैं अब तक जी पाया। खुद ही में खुद से रोया हूँ, खुद ही खुद को सुनते सुनते, इक बार पुनः मैं टूट गया शायद सपने ...

कब तुमने मुझको प्यार दिया : Abhishek Mishra "Satya"

Author :   Abhishek Mishra ;   Lucknow 18 March 2019 Follow on :  Facebook   |  Twitter  |   Linkedin  |  What's app

चखा इश्क का स्वाद जो हमने.. : Abhishek Mishra "Satya"

चखा था जो कभी, इश्क को इत्तेफाक से हमने चखा था जो कभी, इश्क को इत्तेफाक से हमने छाले आज भी जुबान की फितरत बिगाड़ देते हैं मिले थे सुर्ख शोले शब्द बनकर जो नसीहत में याद आकर वो बेब...

अहसासनामा - Abhishek Mishra "Satya"

कुछ अहसास जो ता-उम्र आंखों को आंसुओं से भिगा देंगे.................. छोड़ दुनिया की वादियां खुद में मगरूर हो गए हम अपनी कवायद-ए-इश्क से खूब मशहूर हो गए हम समझते थे खुद को तीस-मारखां जो कभी... एक ...

मेरा ख्वाब हो तुम : Abhishek Mishra "SATYA"

मेरा ख्वाब हो  तुम .... Author :    Abhishek Mishra ; 15 December 2017  Lucknow Follow on :      Facebook  |  Twitter  |  Linkedin    

Abhishek Mishra "SATYA" (aksatya) : कुछ अपनी शेरों शायरी

1.      टूटे हुए इस दिल में थोड़ी आह रहने दो          तुम न सही पर किसी और कि , तो राह रहने दो          हां मालूम है तुम्हे मेरी शकल से नफरत है बहुत.......          पर दिल में तो थोड़ी मेरी चाह रहने दो...........।।                                         - @aksatya100                                         20 August 2017                                                  2. कभी खुशी से खुशी की तरफ नही देखा     तेरे बाद किसी और कि तरफ नही दे...