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भुखमरी सूचकांक दिखा रहा मोदी जी की कथनी और करनी का फर्क...

 Interacting with BJP workers in Varanasi district on 28 August 2018(Tuesday) Prime Minister Narendra Modi claimed that five crore poor people had come out of poverty in the four years that the NDA has been in power and that the lives of three lakh children have been secured through the 'Swachh Bharat' campaign. : Economic Times Report             
Author :   Abhishek Mishra ; Lucknow 28 Oct. 2018  
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●●●●आज से एक वर्ष पूर्व, देश में बढ़ रही भुखमरी की ओर आप सबका ध्यान आकर्षित करते हुए एक फेसबुक पोस्ट के जरिये हमने लिखा था कि यदि इस दिशा में पुख्ता इंतजामात न किये गए तो स्थिति बद्द से बद्दतर हो जाएगी। आज परिणाम आपके सामने है, विश्व भुखमरी सूचकांक के 119 देशों की सूची में हमारा मुल्क 103वें पायदान पर है, वर्ष 2016 में 97वें स्थान से गिरकर 2017 में 100वें तक पहुंचे थे और आज 2018 में पुनः तीन कदम पछाड़ खाकर 103 वें पायदान पर, पीठ थपथपाने को काफी है कि हम अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से अब भी 3 सीढ़ी ऊपर हैं हालांकि नेपाल म्यंमार जैसे देशों का हमसे ऊपर होना चुल्लू भर पानी में डूब मरने जैसा है। "अब पछताए होय का जब चिड़िया चुंग गयी खेत" कहावत का मनन करते हुए आइये कुछ आंकड़ों पर नज़र फेरी जाए।

28 अगस्त 2018 को Economic Times में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक माननीय प्रधानमंत्री जी ने बनारस दौरे के दौरान दावा किया था कि उनकी सरकार ने 5 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर निकला है।
https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/five-crore-people-came-out-of-poverty-pm-modi/articleshow/65582138.cms दावे को महीने भर भी नही बीते होंगे कि इससे पहले  #GlobalHungerIndex2018 ने दूध का दूध पानी का पानी कर दिया, Financial Express में दिनांक 15 अक्टूबर 2018 को प्रकाशित
https://www.google.com/amp/s/www.financialexpress.com/economy/india-ranks-103-on-global-hunger-index/1350352/lite/ इस रिपोर्ट के मुताबिक विश्व भुखमरी सुचकांक में भारत की स्थिती पिछले वर्ष की अपेक्षा तीन कदम पीछे की ओर है।

दोनों लेखों को पढ़ने के बाद मुझे समझ नही आ रहा कि आखिर सच क्या है और झूठ क्या, एक तरफ प्रधानमंत्री जी "सबका साथ सबका विकास" का मंत्र लिए जनता के बीच अपनी सभाओं में विकास के गीत गाये जा रहे तो दूसरी तरफ वैश्विक आंकड़े कुछ और ही कह रहे हैं।

Abhishek Mishra
LL.B Hons.(P.),
Lucknow University
#Yours'Commemt
 @aksatya100  

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