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अहसासनामा : Memoirs of My Platonic Love.... Abhishek Mishra "Satya"



Author :   Abhishek Mishra ; Lucknow 3 July 2020
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    ●●●●●कोई लड़का जब बेहद भावुक उदास निराश होता है तो वह विरह वेदना में व्यतीत हो रहे हर पल को अपने आंसुओं की स्याही से गीत ग़ज़ल शेर शायरी अथवा संस्मरणों में पिरोने की कोशिश करता है। उसकी तड़प, उसकी बेबसी  उसकी वेदना संवेदना एवं उसकी क्षण क्षण पर उमड़ती भावनाएं  एक कविता गीत ग़ज़ल लेखों का आकार लेती हैं..... किन्तु ये Hippiee Culture में जी रही उसकी माशुकायें न तो छंदों का शास्त्र समझ सकती  हैं ना उसके रदीफ़ और काफ़िये का अहसास ....... शायद इसीलिए ये अटूट निश्छल इश्क़ और मोहब्बत उनके समझ से बाहर है। विगत 7 वर्षों के अनुभवओं ने बस एक ही चीज़ सिखाया है कि इश्क़ और आंसू एक दूसरे के ही अभिप्राय हैं  , यकीन न हो तो आज़मा के देख लो। प्यार शब्द ही अब मेरे लिए एक हास्यस्पद सी अवधरणा हो गयी है......खैर लोगों के अपने अपने सुखद निजी अनुभव व नजरिये हो सकते हैं।

अगर सुन पा रहे हो तो गौर से सुनो की तुम रैपर पर छपी कीमत देख कर समान खरीदने वाले लोग थे, और मैं न तो गाड़ी वाले किसी अमीर बाप की औलाद था न कोई जबरदस्त शारीरिक बनावट वाला Rocker Playboy....जो कुछ भी था वो बस मात्र मेरा निश्छल पवित्र मन और एकदम अनछुआ सा साफ सुरक्षित दिल .......और उन दोनों के हर कोने में बसी आपकी एक नई नई सी तस्वीर, जिसे देख कर हर रोज मेरी अनगिनत उम्मीदें मेरे स्वप्न सजते थे। इक रोज वह सब कुछ टूट सा गया जो कुछ पिछली दो-चार बार की कोशिशों में तुम पूरी तरह नही तोड़ पाए थे........ इस बार तुम सफल हुए वो सब कुछ खत्म कर पाने में........

सच पूछो तो जीवन में बहुत लड़कियां आयीं और गयीं...! कुछ मेरे आर्थिक हालत , शारीरिक बनावट से मुझे छोड़ कर चली गयीं तो कुछ को मेरा Over Possessive होना नहीं पसंद आया, कुछ को मेरे नैतिक आदर्शों से तो कुछ को मेरी अनियंत्रित अपेक्षाओं से समस्या थी।इन सब में विचलित हुआ एक आध के लिए तो महीनों मानिसक पीड़ा झेली, बच्चों सा फूट फूट कर रोया......कुछ को अब भी भुला पाना नामुमकिन सा प्रतीत होता है। इन सब से उपजी मानसिक कुंठा एवं बारंबार असफलता ने मेरी प्रगति को कहीं न कहीं से प्रभावित किया होगा...फिलहाल अभी वह दृष्टिगोचर नही हो रहा। ईश्वर की कृपा दृष्टि समझो या फिर शुभेच्छुजनों का आशीष किन्तु एक दिलचस्प बात यह भी  रही कि इन सबके बीच हर समय, हर समस्या में सदैव मेरे पास मेरी किताबें मेरी ताकत बनकर खड़ी रहीं, निरन्तर मुझे आत्मविश्वास से ओत प्रोत करती रहीं.......... बस एक ही तो गर्लफ्रेंड-माशूक य्या इश्क है जो सचमुच मुझे प्यार करती है। जो बिना किसी अपेक्षा अथवा विवाद किये 24 घंटे मेरे साथ होती है, जिसके लिए मेरा प्यार सदैव अविभाजित रहा...........और सम्भवता जीवन पर्यन्त बरकरार रहे।

यकीनन मेरी पढ़ाई मेरे उस धर्मज पत्नी की तरह थी जिसके साथ विवाह करके घर वालों ने मुझे सप्रेम विदा किया था, इस वचन के साथ कि मैं किसी और आकर्षण की तरफ आंख उठाकर के नहीं देखूंगा और यह आशिकी मोहब्बत महज उस रखैल की तरह थी जिनसे छुप-छुपकर मिले बिना दिल भी नहीं मानता था और सामाजिक तौर पर स्वीकार करने में भी बड़ी अड़चने थीं।

बस अपनी इन्हीं चंद पुस्तकों में सिमटी हुई एक बेहद निजी दुनिया में नित नव स्वप्न सजाकर, हर रोज नई उम्मीद जगाकर द्वंद एवं कशमकश भरी जिंदगी में प्रत्येक क्षण एन केन प्रकारेण गुजर रहा है.....

MyPlatonicLove【1July 2020】 कहानी अब भी जारी है.....

आपका!.
Abhishek Mishra
LL.B Hons.(P.),
Lucknow University
#Yours'Commemt  @aksatya100

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